निदेशक का संदेश

सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनजीआरआई) में आपका स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है। सीएसआईआर-एनजीआरआई भारत में एक महत्वपूर्ण और अग्रणी पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान संस्थान है और दुनिया भर में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों में इसकी मौजूदगी दर्ज है। 1961 में स्थापित, सीएसआईआर-एनजीआरआई ने बहुत ही समर्पित वैज्ञानिकों और सहायक तकनीकी स्टाफ के द्वारा अपने शोध एवं नवाचार के माध्यम से भौमविज्ञान परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। हमारे वैज्ञानिक योगदान पृथ्वी की संरचना, गतिकी और संसाधनों के बारे में ज्ञान की समझ को और आगे बढ़ाते हैं जो कि सीएसआईआर-एनजीआरआई स्थापना का ध्येय है। पिछले वर्षों में, संस्थान ने आधुनिक अभिकलनात्मक और विश्लेषणात्मक सुविधाओं, साथ ही अत्याधुनिक क्षेत्र भूभौतिकीय उपकरणों को हासिल किया है, जिससे कि पृथ्वी के अभ्यंतर, विशेष रूप से भारतीय उपमहाद्वीप की खोज करने हेतु प्रयोगों को अभिकल्पित करने, परिकल्पनाओं का परीक्षण करने और उनकी पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक समर्थ बन पाए हैं। 


जल, ऊर्जा तथा खनिजों के लिए निरंतर घटते हुए उपलब्धता बनाम मांग के अनुपात के कारण उत्पन्न होने वाला संकट और भूजोखिमों के बारे में बढ़ती हुई चिंता, जाहिर तौर पर पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान को मानवीय अन्वेषण में अग्र स्थान पर रखती है। जल, ऊर्जा और भूगर्भीय जोखिमों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए, हम मौलिक एवं अंतरविषयी भूवैज्ञानिक खोज के माध्यम से अपने प्रयास कर रहे हैं। वैज्ञानिक चुनौतियों को निष्पादित करने के लिए, हम अनुसंधानकर्ताओं द्वारा संचालित विज्ञान से  मिशन प्रणाली परियोजनाओं की ओर बढ़ रहे हैं, जो कि प्रेरित अनुसंधान पद्धति पर आधारित हैं, अर्थात् मौलिक वैज्ञानिक मुद्दों के लिए समाधान चाहना और समाज के लिए तत्काल उपयोग में लाने के उद्देश्य से वैज्ञानिक समाधान ढूंढ़ना।


किसी भी रूप में ज्ञान के मुद्रीकरण जिसे चार वर्गों में सीएसआईआर द्वारा पहचान की गई है वे इस प्रकार हैं; निजी, सामरिक, सार्वजनिक, और सामाजिक भलाइयाँ जो देश के विकास के लिए अतिमहत्वपूर्ण हैं, हालांकि वास्तविक वाणिज्यिक उगाही का समय काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। मैं कल्पना करता हूँ कि वैज्ञानिकों, अनुसंधान छात्रों, तकनीकी और सहायक कर्मचारियों की एक तत्पर टीम के साथ, हम सीएसआईआर की उम्मीदों, जो कि अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय आवश्यकताओं के साथ संरेखित हैं और वैश्विक भूवैज्ञानिक मुद्दों को संबोधित कर रही हैं, को पूरा करेंगे।

पृष्ठ अंतिम अपडेट: 11-04-2018