विद्युत-चुंबकीय भूभौतिकी पृथ्वी के विद्युत-चुंबकीय वातावरण के गुणधर्मों का अध्ययन करती है और प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण करने के साथ- साथ मूलभूत भूगतिक प्रक्रियाओं को समझने के उद्देश्य से भूमि की सतह के नीचे कुछ मीटर से लेकर सैकड़ों किलोमीटर गहराइयों तक बहु-पैमानों पर अधस्तल चालकीय संरचना को स्पष्ट करने की दृष्टि से विद्युत-चुंबकीय सिगनलों में परिवर्तन के प्रति पृथ्वी की प्रतिक्रिया का उपयोग करता है। 1970 से पहले, जब दुनिया में केवल कुछ विद्युत-चुंबकीय उपकरण थे, सीएसआईआर-एनजीआरआई ने सर्वप्रथम इस तरह की आधुनिक सुविधा का अभिकल्प, निर्माण एवं संस्थापित किया, जो कि भारत में और उससे बाहर सभी विद्युत-चुंबकीय विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया। एनजीआरआई का नेतृत्व, 1966 में, कई प्रकार की परिशुद्ध चुंबकत्वमापियों एवं संवेदकों के आंतरिक अभिकल्प एवं विकास के इर्द-गिर्द ध्यान केंद्रित करने के साथ वायुवाहित चुंबकीय सर्वेक्षणों के क्षेत्र में बना रहा। आंतरिक उपकरणों एवं वेधशाला अभिलेखों का उपयोग करके मैग्नेटो-टेलूरिक और भूचुंबकीय प्रेरण अध्ययन प्रारंभ किए गए थे। एनजीआरआई ने चुंबकीय भूमध्य रेखा की रूपरेखा तैयार करने के लिए बहुत सटीक सर्वेक्षण संचालित किया और ये परिणाम ' नेचर ' में प्रकाशित किए गए। संस्थान के प्रारंभिक वर्षों में एक अग्रणी परियोजना सम्पादित की गई थी, जिसमें कर्नाटक सह्याद्री के समानांतर वायुचुंबकीय सर्वेक्षण और लोह-अयस्क शैल समूहों का मानचित्रण समावेश था। इस कार्य को प्रोटॉन पुरस्सरण चुंबकत्वमापी, एक 35 मिली मीटर कैमरा उपयोग करके और एक डकोटा डीसी-3 विमान पर एक प्रस्फुरमापी रखकर संपन्न किया गया था।

सीएसआईआर-एनजीआरआई में विद्युत-चुम्बकीय भूभौतिकी समूह हाइड्रोकार्बन और खनिजों के अन्वेषण के लिए, भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय अंतराफलक और फलक परिसीमा क्षेत्रों को समझने के लिए, भारतीय क्रेटॉनों का प्रतिबिम्बन, पूर्वगामी अध्ययन और भूचुंबकत्व के लिए मुख्यतः भारतीय महाद्वीपीय क्षेत्र के लिए विशिष्ट चालकीय संरचनाओं को निरूपित करने के लिए अध्ययन करने में सक्रियता से लगे हुए है। नवीनतम विस्तृत बैण्ड एवं दीर्घ अवधि मैग्नेटोटेलूरिक (एम टी) उपस्कर के अलावा, यह समूह वायुवाहित अन्वेषण के लिए एक हेलीवाहित बहुमुखी चलायमान विद्युतचुंबकीय (वी टी ई एम)  प्रणाली के साथ सुसज्जित है। एक स्थायी भूचुंबकीय वेधशाला, जो कि वैश्विक नेटवर्क का एक हिस्सा है, सीएसआईआर-एनजीआरआई के विद्युतचुंबकीय भूभौतिकी समूह द्वारा संचालित की जा रही है।  

पृष्ठ अंतिम अपडेट : 24-10-2018