सीएसआईआर-एनजीआरआई में भूकंप संबंधी अध्ययनों की लंबी और मजबूत परंपरा है और भूकंपों को दर्ज करने और पता लगाने से लेकर शहर के स्तर पर खतरे के नक्शे तैयार करने तक, अन्तराफलक महा भूकंपों के साथ-साथ जलाशय के कारण सक्रिय होने वाली भूकम्पनीयता का अनुसंधान करना, उपमहाद्वीप पर, विशेष रूप से हिमालय, जो कि दुनिया में सब से कम उम्र वाली और सब से ऊंची पर्वत श्रृंखला है, तथा अंडमान अधो-पतन क्षेत्र के तले, भूपर्पटी एवं प्रावार की संरचना की जांच-पड़ताल करना जैसे विविधतापूर्ण कार्य संपन्न किए जाते हैं। भूकंपीय वेधशाला 1967 में क्रियाशील हुई थी और तब से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय तथा जनता को भूकंप अभिलेख उपलब्ध कराने के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अभिकरणों, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को स्थानीय और क्षेत्रीय भूकंपों पर ठोस और त्वरित जानकारी देती आ रही है। इस वेधशाला ने पूर्वी धरवाड़ क्रैटन (ई डी सी), गोदावरी द्रोणिका और दक्कन ज्वालामुखी प्रांत (डी वी पी) के दक्षिणी पश्चिम भाग में भूकंप गतिविधि का अनुवीक्षण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नतीजतन, भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों के कई नए और प्रमुख स्रोतों की पहचान की गई और उनका स्थान निर्धारण किया गया। वे हैं: ई डी सी में ओंगोल, भद्राचलम, कडपा द्रोणी, कोलार और हैदराबाद क्षेत्र, दक्कन ज्वालामुखी प्रांत के दक्षिण पश्चिमी भाग में कोयना, ब्रोच और किलारी। हाल के वर्षों में वेधशाला के वैज्ञानिकों ने शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए पाठशाला आधारित भूकंप-लेखियों का संस्थापन करने तथा भूकंप आंकड़ों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ सभी स्तरों पर अध्यापकों, छात्रों को आउटरीच शिक्षा देने में एक अग्रणी भूमिका निभाई है।

पृष्ठ अंतिम अपडेट : 19-04-2018