एसीएसआईआर के बारे में

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) विधेयक, 2010 को दिनांक 05 सितंबर 2011 को लोकसभा में प्रस्तुत एवं पारित किया। इस विधेयक को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के सहयोग से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस & टी) के क्षेत्र में अधिगम की उन्नति करने और अनुसंधान के अनुशीलन के प्रोत्साहन के लिए एक अकादमी की स्थापना करने के उद्देश्य से और वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी नामक संस्था को उसकी स्थापना और इससे संबंधित या आनुषंगिक विषयों के लिए प्रावधान करने हेतु उसे राष्ट्रीय महत्व रखने वाली संस्थाओं में से एक के रूप में घोषित करने के लिए प्रस्तुत किया गया।

इस अकादमी के उद्देश्य ये हैं - अधिगम की ऐसी शाखाओं में, जो वह ठीक समझे, विशेषकर उभरते हुए क्षेत्रों या ऐसे क्षेत्रों, जो भविष्य में उभर सकते हैं, में अध्यापन एवं अनुसंधान सुविधाएँ उपलब्ध कराने के जरिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उन्नत ज्ञान का प्रसार करना; अंतर-विषयी अध्ययन और अनुसंधान कार्य करना; प्राकृतिक विज्ञान, जीवन विज्ञान, गणितीय और संगणना संबंधी विज्ञान, आयुर्विज्ञान, इंजीनियरी, अनुप्रयोजित कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, इन क्षेत्रों से संबंधित विधि और उनके अंतरापृष्ठों वालों को शामिल करते हुए अंतर-विषयक और बहु विषयक क्षेत्रों में पाठ्यक्रमों का संचालन करना और अपने पाठ्यक्रमों में समाहित करना; अध्यापन एवं अधिगम प्रक्रियाओं में नवोन्मेषों के लिए समुचित कदम उठाना; केवल अंकों या ग्रेडों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उन्नत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अधिगम तथा विद्वत्ता के लिए माहौल बनाना; वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिकीय क्षेत्रों में जनशक्ति को शिक्षण एवं प्रशिक्षण देना; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारत में और बाहर स्थित उद्योगों के साथ संपर्क स्थापित करना; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत में या बाहर स्थित प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं के साथ मिलकर उपयुक्त क्षेत्रों में काम करना; जनता के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और शैक्षणिक कल्याण पर असर करने वाले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को बढ़ावा देना। यह अकादमी मुख्य रूप से ऐसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जो भारत में सामान्यतया नियमित अकादमिक विश्वविद्यालयों में नहीं पढ़ाए जाते हैं। अकादमी के पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन नवोन्मेषी होंगे और पार-विषयी ज्ञान युक्त उच्चतम-गुणवत्तापूर्ण कार्मिकों को तैयार करने की दिशा में होंगे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मार्गदर्शकों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखेंगे। इस अकादमी को अध्यापन एवं अनुसंधान हेतु आपसी फायदे के लिए सीएसआईआर की मूलभूत सुविधाएँ और वैज्ञानिक जनशक्ति उपलब्ध कराई जाएगी या उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।

एसीएसआईआर एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था होगी। इस अकादमी का ढाँचा पहिये की नाह-और-अरा नमूने पर आधारित एक बहु-केंद्रित संस्था के ढाँचे की तरह होगा। नई दिल्ली में स्थित सीएसआईआर मुख्यालय नाह के रूप में कार्य करेगा जोकि केंद्रीकृत प्रशासन के लिए उत्तरदायी होगा। उसे सभी 37 सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं (अरे) के साथ जोड़ा जाएगा जोकि अपनी-अपनी विशेषज्ञताओं के आधार पर विभिन्न विषयों/क्षेत्रों के लिए वास्तविक परिसरों के रूप में कार्य करेंगी। भविष्य में विज्ञान तथा इंजीनियरी में भारत का नेतृत्व, अन्य बातों के साथ-साथ, विज्ञान तथा इंजीनियरी के समग्र एवं अंतर-विषयी क्षेत्रों में उसकी प्रगति पर निर्भर होगा। एसीएसआईआर विज्ञान तथा इंजीनियरी के समग्र एवं अंतर-विषयी क्षेत्रों में लागत प्रभावी ढंग से अनुसंधानकर्ताओं की संख्या को काफी हद तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह अकादमी उच्च शिक्षा में उपरोक्त आवश्यकता को पूरा करने कि लिए सीएसआईआर के सामर्थ्यों, जिसमें विज्ञान तथा इंजीनियरी की विभिन्न शाखाओं में कार्यरत लगभग 4500 वैज्ञानिक शामिल हैं, और उसकी अनुसंधान एवं विकास की मूलभूत सुविधाओं का उपयोग करके एक ही स्थान पर समाधान उपलब्ध कराएगी।