भूगतिकी

भूगतिकी पृथ्वी की गतिकी से संबद्ध भूभौतिकी का पहलू है। वह प्लेट विवर्तनिकी और समुद्र अधस्तल विस्तारण, पर्वत रचना, ज्वालामुखियाँ, भूकंप, भ्रंशन तथा वलन जैसे भूगर्भीय दृग्विषयों के लिए कारण बनने वाले प्रावार संवहन को समझने के लिए भौतिकी, रसायनिकी एवं गणित को अनुप्रयुक्त करती है। असल में पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान का यह पहलू सामाजिक-वाणिज्यिक फयदों के लिए भू-सूचना के अनुप्रयोगों से संबधित सभी अध्ययनों के लिए रीढ़ है। अधोपतन संघट्टन मंडल, कैम्ब्रियनपूर्व क्रेटानी प्रदेश, महाद्वीपीय सीमांत, अभूकंपी कटक जैसे विभिन्न विशिष्ट भौमकीय भूभागों में संरचना तथा प्रक्रियाओं का अनुसंधान करने हेतु भूकंप विज्ञान, गुरुत्व, चुंबकीय, चुंबकपार्थिव, भूरासायनिक आँकड़ों का प्रयोग करके भूगतिकी में शोध करने को लेकर एनजीआरआई का एक लंबा इतिहास है। एनजीआरआई में जन्मे भूगतिकी से संबंधित अग्रणी योगदानों में शामिल हैं हिमालय के तले भूपर्पटी का द्विगुणन, अंडमान-निकोबार खाई में अधोपतन की प्रकृति, पश्चिमी, पूर्वी धारवाड़ क्रेटान एवं सिंहभूम क्रेटान, जो कि दुनिया में महाद्वीपों के प्राचीनतम भाग हैं, की संरचना और क्रमिक विकास।