भूजल

अपनी स्थापना से ही भूजल अन्वेषण एवं प्रबंध एनजीआरआई का एक प्रधान कार्यक्रम है। पानी-अभाव से पीड़ित क्षेत्रों में भूजल अन्वेषण के लिए विभिन्न जलभरों के विन्यास को चित्रित करने हेतु प्रतिरोधकता सर्वेक्षण विस्तृत रूप से अनुप्रयोग किए गए। भूजल प्रवाह को प्रतिरूपित करने के लिए आवश्यक वर्षण, पुनर्भरण एवं निष्कर्षण जैसे परिवर्तनशील पैरामीटरों के कारण होनेवाली जलभरों की गतिशीलता पर भी ये अध्ययन ध्यान केंद्रित करते हैं। एनजीआरआई आर-सी ऐनलॉग प्रतिरूपण में विशेषज्ञता रखता है लेकिन अब संख्यात्मक प्रतिरूपण में उन्नयन हुआ है। जलभर अतिदोहन के कारण होने वाले जलगतिकीय परिवर्तनों को दृश्यमान करने के लिए अनुरेखक अध्ययन करने की अनन्य क्षमता इस देश में एनजीआरआई के पास ही है। भूजल कालनिर्धारण के लिए प्रयोगशाला सुविधाएँ स्थापित की गई हैं और जटिल जलीय तंत्रों पर अनुप्रयोग की गई हैं। सीएसआईआर-एनजीआरआई ने भारत में पहली बार सफलता से अत्याधुनिक हेलीवाहित चलायमान विद्युतचुंबकीय अन्वेषण किया और देश में मौजूद लगभग सभी प्रकार के भूगर्भीय शैलसमूहों को शामिल करते हुए जलभर तंत्रों और उनके स्थानीय लक्षणों पर दिलचस्प परिणम प्राप्त किए। भारत में प्राकृतिक जल तंत्रों को बढ़ाने और सुरक्षित एवं संपोषणीय जल आपूर्ति के लिए उपचार से संबंधित प्रयास किए जा रहे हैं।