विशेष गतिविधियाँ

जीपीएस एवं अंटार्कटिका:
सीएसआईआर-एनजीआरआई में जीपीएस समूह जीपीएश मापनों का उपयोग करके भारतीय उपमहाद्वीप के प्लेट सीमा एवं अंतराप्लेट क्षेत्रों में भूकंप घटना प्रक्रियाओं की समझ के जरिए भारतीय प्लेट की भूगतिकी को समझने और भूकंपी जोखिम का वस्तुनिष्‍ठ मूल्यांकन करने की दिशा में कार्य करता है। कश्मीर हिमालय, काराकोरम भ्रंश तंत्र, गढ़वाल-कुमाऊं हिमालय, भारत-बर्मी फान, शिलांग पठार, अंडमान-निकोबार द्वीप, कोयना-वर्ना क्षेत्र एवं भारतीय शील्ड में भूकंपी जोखिम निर्धारित करने के लिए इस समूह द्वारा 100 से अधिक स्थायी जीपीएस स्टेशन संचालित एवं अनुरक्षित किए जा रहे हैं। अंटार्कटिका के लिए भारतीय वैज्ञानिक अभियान के भाग के रूप में, मुख्य रूप से अंटार्कटिका में और उसके आस-पास भूकंपनीयता मॉनिटर करने और इस भूकंपीय दृष्टि से शांत महाद्वीप में भूपर्पटीय विरूपण के कारण, हिमनदीय एवं जलवायु संबंधी प्रक्रियाएँ समझने हेतु इस समूह ने भारतीय आधार स्टेशन, मैत्री, पर वर्ष 1997 में एक स्थायी भूकंपवैज्ञानिक एवं जीपीएस वेधशाला स्थापित की है।
चुंबकीय वेधशाला:
चुंबकीय वेधशालाओं का उद्देश्य, चुंबकीय क्षेत्र वेक्टर के समय विचरणों को लम्बी अवधि में लगातार दर्ज करना और मापनों का सही परम मानक बनाए रखना है। इसे हासिल करने के लिए, हैदराबाद (एच वाई बी) चुंबकीय वेधशाला 1965 के दौरान स्थापित की गई थी और चौटुप्पल (सी पी एल) वेधशाला 6 अक्तूबर 2014 को स्थापित हुई। ये वेधशालाएँ विविध प्रकार की चुंबकत्वमापियों (त्रि-अक्षीय अंकीय फ्लक्सगेट चुंबकत्वमापी, ओवरहासर प्रोटॉन अयन चुंबकत्वमापी, दिक्पात एवं आनति चुंबकत्वमापी) से सज्जित हैं, जिनमें चुंबकीय क्षेत्र में समय विचरणों को 01 एवं 05 सेकंड प्रतिचयन अंतराल के साथ लगातार दर्ज किया जाता है और भूचुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता एवं दिशा के मूल्य जानने के लिए नियमित परम मापन नियमित तौर पर किए जा रहे हैं।  
सीएसआईआर 800:
यह कार्यक्रम बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अवधारण किया गया और 2012 में शुरू किया गया था। सीएसआईआर-800 परियोजना का प्रमुख उद्देश्य, देश के लिए प्रासंगिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्रियाकलापों में भागीदारी करने के द्वारा एक समाजिक चेतना एवं उत्तरदायित्व की भावना सृजित कर विकसित करना है। सीएसआईआर-800 के दो प्रमुख केंद्र बिन्दु के क्षेत्र भारत के 800 मिलियन लोगों की आय बढ़ाना और उमकी जीवन गुणता में सुधार लाना है। एनजीआरआई ने संस्थान में किए जाने वाले विज्ञान के योगदानों को सीधे तेलंगाणा के गांवों के लोगों तक पहुंचाने के लिए सीएसआईआर 800 केंद्र बिन्दु क्षेत्रों में पेय जल के मुद्दे को लिया है।